डूंगरपुर जिला - Dungarpur district

नमस्कार दोस्तों आज हम डूंगरपुर जिला - Dungarpur district के बारे में जानने वाले है जिसमे हम rajasthan general knowledge के अंतर्गत आनेवाले डूंगरपुर का इतिहास ( Dungarpur District GK in Hindi ) को जानने वाले है

डूंगरपुर जिला - Dungarpur district

डूंगरपुर जिला - Dungarpur district

इस डूंगरपुर जिला को वागड़ के नाम से जाना जाता है अब वागड़ को दो हिस्सों में बांटा जा चुका है पहला डूंगरपुर है और दूसरा जो हिस्सा है वह बांसवाड़ा जिला है |

डूंगरपुर को कई नामों से जाना जाता है जिसमें पहाड़ों की नगरी डूंगरिया भील की ढाणी और भीलो की पाल Dungarpur जिला प्राची वागड़ राज्य का एक हिस्सा था जिसे  उदयसिंह के वीरगति को प्राप्त होने के बाद उनके कहे अनुसार पृथ्वी सिंह और जगमाल सिंह के बीच बांट दिया गया था जिसमें  बांसवाड़ा और पृथ्वी सिंह के हिस्से में Dungarpur राज्य आता है


आज हम डूंगरपुर जिले की सभी जानकारियां और इतिहास देखने वाले हैं जिसे बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा गया है आप भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लगे हैं Dungarpur के इस टॉपिक को क्लियर कर देंगे


गुलशन सिंह के द्वारा एक वादा राज्य की स्थापना की गई जिसे वागड़ कहा गया सामंत सिंह के बाद वागड़ राज्य के कई उत्तरदाई अधिकारी बने और उन्होंने वागड़ राज्य पर अपना राज्य सुचारु रुप से चालू रखा


वागड़ क्षेत्र का बटवारा


जब मेवाड़ के शासक महाराणा सांगा थे तब उनके द्वारा खानवा का युद्ध लड़ा गया था  राणा सांगा के द्वारा सभी राजस्थान के राजाओं  से सैन्य सहायता मांगी गई थी (प्रार्थी प्रवेंन प्रथा के अनुसार) जिसके बाद वागड़ की तत्कालीन शासक महारावल उदय सिंह ने खानवा के युद्ध में भाग लिया जिसके बाद खानवा के युद्ध में ही महारावल उदय सिंह वीरगति को प्राप्त हुए


महारावल उदयसिंह के 2 पुत्र थे एक का नाम था पृथ्वी सिंह और दूसरे पुत्र का नाम था जगमाल सिंह जिसके बाद जगमाल सिंह को बांसवाड़ा का हिस्सा दिया गया जिसके बाद महारावल जगमाल सिंह के द्वारा बांसवाड़ा को बसाया गया महारावल पृथ्वी सिंह डूंगरपुर मिला इसी बंटवारे में वागड़ क्षेत्र के दो हिस्से हुए जिसमें पहला हिस्सा Dungarpur रहा और दूसरा हिस्सा बांसवाड़ा


वागड़ शब्द की उत्पत्ति


वागड़ शब्द की उत्पत्ति गुजराती भाषा के शब्द से हुई है इसका अर्थ होता है जंगल और पहाड़ों का प्रदेश है


पहाड़ों की नगरी


इस प्रश्न को कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा गया है कि पहाड़ों की नगरी किसे कहते हैं तो आपको बता दें कि पहाड़ों की नगरी राजस्थान में स्थित Dungarpur जिले को ही कहा जाता है क्योंकि इसका मुख्य कारण यह है कि Dungarpur चारों ओर से पहाड़ों से घिरा हुआ है और डूंगरपुर में छोटे बड़े पहाड़ अत्यधिक संख्या में उपस्थित है


डूंगरपुर जिले की भौतिकी स्थिति 


यह जिला उदयपुर संभाग में आता है और Dungarpur जिला राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित है


इस जिले के चारों ओर अरावली पर्वतमाला है इस जिले का अधिकांश भाग पथरीला और पहाड़ियों से निर्मित है


यह जिला उदयपुर संभाग में आता है इस जिले के उत्तर में उदयपुर है पूर्व में बांसवाड़ा है और दक्षिण वह पश्चिम की दिशा में गुजरात की सीमा लगती है गुजरात की सीमा लगने के कारण Dungarpur में निवास करने वाले लोगों की बोली में गुजराती भाषा की झलक देखने को मिलती है| 


डूंगरपुर में स्थित नदिया झीले और बांध


dungarpur district में सोम माही जाखम यह तीनों नदियां बहती है और एक त्रिवेणी संगम का निर्माण करती है


गैप सागर झील


Dungarpur की सबसे प्रसिद्ध झील गैप सागर झील का निर्माण महारावल गोपीनाथ के द्वारा करवाया गया था और गैप सागर झील के किनारे हैं उदयविलास महल स्थित है गैप सागर झील dungarpur district आकर्षण का केंद्र बनी हुई है


सोम-कमला-अम्बा परियोजना


इस परियोजना का निर्माण सोम नदी पर किया गया है सोम कमला अम्बा परियोजना के द्वारा आसपुर क्षेत्र सलूंबर क्षेत्र की तहसीलों में सिंचाई इसी परियोजना के तहत  की जाती है 


यह परियोजना dungarpur district की सिंचाई परियोजना है


एडवर्ड संमद बांध


इस बांध का निर्माण महारावल विजय सिंह ने अंग्रेजी गवर्नर जनरल एडवर्ड की स्मृति में प्रारंभ करवाया था इस को पूरा महारावल लक्ष्मण सिंह ने करवाया इस तालाब को लोग पहले पाटिया तालाब के नाम से जानते थे


नौलखा बावड़ी 


इस बावड़ी का निर्माण राजा ने ना करवा कर एक रानी ने करवाया था जिन का नाम प्रेम देवी था और यह महारावल आसकरण की रानी थी यहां डूंगरपुर की एक भव्य बावड़ी है


राजस्थान का सर्वाधिक पशु घनत्व वाला जिला Dungarpur है  डूंगरपुर जिले का पशु घनत्व 309 है 


डूंगरपुर जिले की कुछ खास बातें

  • dungarpur district का वार्षिक वर्षा वर्षा 76.10 सेंटीमीटर
  • डूंगरपुर जिले में जालौर मृदा पाई जाती है 
  • Dungarpur जिला का सर्वाधिक तापमान 38 डिग्री सेल्सियस होता है और कम से कम 9 डिग्री सेल्सियस तक रहता है
  • डूंगरपुर जिला का राजस्थान में क्षेत्रफल की दृष्टि से 31 वा स्थान है और जनसंख्या घनत्व के अनुसार आठवां स्थान है एवं जनसंख्या के अनुसार 25 वा स्थान है
  • भारत का प्रथम पूर्ण साक्षर आदिवासी जिला है
  • राजस्थान में  उदयपुर डूंगरपुर एवं बांसवाडा आदि क्षेत्र में की जाने वाली झुमिग खेती को बालरा कहते हैं


डूंगरपुर के प्रमुख मेले एवं  उत्सव

  1. बेणेश्वर मेला - आदिवासियों का कुंभ के नाम से प्रसिद्ध बेणेश्वर मेला साबला क्षेत्र  के नवा टापरा गांव में माघ पूर्णिमा के अवसर पर भरता है यह मेला चार दिनों तक चलता है यह मेला बेणेश्वर मंदिर त्रिवेणी संगम पर भरता है
  2. रथ  उत्सव डूंगरपुर के पीठ गांव में मनाया जाता है
  3.  प्रसिद्ध मुरला गणेश मंदिर डूंगरपुर जिले में स्थित है
  4.  डूंगरपुर के गलियाकोट क्षेत्र में दाऊदी बोहरा समुदाय का उभरता है यह उस मुहर्रम की 27 तारीख को भरता है और गलियाकोट क्षेत्र रमकड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है
  5. नीला पानी का मेला हथोड़ गांव में भरता है यह भी Dungarpur district में स्थित है
  6.  विजवा माता का मेला आसपुर तहसील में पड़ता है यह मंदिर लकवा मरीजों के लिए प्रसिद्ध है
  7. राजस्थान का राड रमण महोत्सव डूंगरपुर में होली के दूसरे दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) आयोजित होता है
  8. पित्र पूजा महोत्सव डूंगरपुर -  आदिवासी जनजाति के द्वारा पत्र एवं पूजा के लिए दिवाली के 14 दिन बाद कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के इस त्यौहार को मनाया जाता है इस महोत्सव में आदिवासी समाज के लोगों द्वारा अपने पूर्वजों को याद किया जाता है
  9. डूंगरपुर जिले में नवीनतम स्वर्ण भंडार की खोज की गई है जो निम्न है 1. जगपुरा - भुखिया 2. फादर की पाल 3. खमेरा में 

डूंगरपुर जिले के प्रमुख व्यक्तित्व


अब इस में हम ऐसे मह्पुरुष और विशेष व्यक्तित्व के बारे में जानने वाले है जिनहोने डूंगरपुर में जन्म लिया एवं अलग व प्रमुख व्यक्तित्व बनाया


गुरु गोविंद गिरी

  1. इनका जन्म Dungarpur district में 1858 ने बांसिया गांव में एक बंजारे की परिवार में हुआ था इनकी द्वारा भगत आंदोलन (भील आंदोलन)  चलाया गया था
  2. गुरु गोविंद को आदिवासी भील जनजाति अपना गुरु मानती है एवं इनका मंदिर बांसिया में  बेडसा गांव में स्थित है

भोगीलाल पंड्याण

  1. इन्हें वागड़ का गांधी भी कहा जाता है इनके द्वारा वागड़ सेवा मंदिर वाकड़ सेवा संघ एवं डूंगरपुर सेवा मंडल की स्थापना की गई थी इनके द्वारा 1 अगस्त 1944 को डूंगरपुर प्रजामंडल की स्थापना की गई थी
  2. डूंगरपुर में हरिजन समिति की स्थापना भोगीलाल पंड्या के द्वारा ही की गई थी
  3.  भोगीलाल पंड्या की धर्मपत्नी मणि बहन पंड्या को वागड़ की बा और बहन कहा जाता है
  4. भोगीलाल पंड्या एवं मणि बहन पंड्या को जनजाति से वाया मानवता की सेवा एवं राष्ट्र की सेवा के लिए जाना जाता है इसके लिए इन्हें भारत सरकार द्वारा 1976 में पद्म भूषण पुरस्कार के द्वारा सम्मानित भी किया गया था

कालीबाई

  1. यह एक वीर बालिका थीजिसने अपने गुरुसेंगा भाई खांट को बचाते हुए वीरगति को प्राप्त हुई
  2. 19 जून 1947 को डूंगरपुर रियासत के रास्ता पाल गांव में चलती हुई पाठशाला को बंद करवाने के लिए अंग्रेज सैनिक पहुंचे तब उस पाठशाला के शिक्षक सेंगा भाई खांट ने पाठशाला को बंद करने से मना कर दिया तब अंग्रेज सैनिकों द्वारा सिंगा भाई खाट को अंग्रेज अधिकारियों की गाड़ी के पीछे बांधकर घसीटा जा रहा था तब वहां पर उनकी गुरु भक्त ने गाड़ी के पीछे सिंगा भाई खाट को घसीटते हुए देखकर हसिया लेकर  उस रस्सी को काट दिया और अपने शिक्षक को मुक्त करवा दिया परंतु अंग्रेज सैनिकों ने काली बाई को गोलियों से  छलनी कर दिया जिसके बाद वह अपने गुरु को बचाते हुए वीरगति को प्राप्त  हो गई


बेणेश्वर मंदिर /  बेणेश्वर धाम

  1. यहां मंदिर डूंगरपुर जिले की आसपुर तहसील के साबला क्षेत्र के नवाटापरा गांव में  सोम माही एवं जाखम नदी के तट पर स्थित है
  2. इस मंदिर का निर्माण संत मावजी के द्वारा करवाया गया था और बेणेश्वर धाम को ही संत मावजी की तपोभूमि भी कहा जाता है
  3. बेणेश्वर मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसमें खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है
  4. इसी बेणेश्वर धाम को आदिवासियों का  कुंभ कहां जाता है और यह माघ पूर्णिमा के दिन बढ़ता है और इसी मेले में भील जनजाति के लोगों का जनसैलाब उमड़ता है यह मेला इतना प्रसिद्ध है कि देश विदेश से आदिवासी जनजाति यहां पहुंचती है


संत मावजी महाराज

  1. संत मावजी का जन्म बेणेश्वर धाम से कुछ दूरी पर साबला गांव में हुआ था संत मावजी को ही वागड़ का धणी कहा जाता है |
  2. साबला गांव में संत मावजी महाराज का मंदिर साबला गांव में स्थित है और संत मावजी के द्वारा एक संप्रदाय चलाया जिसे निष्कलंक संप्रदाय कहां जाता है और निष्कलंक संप्रदाय की पीठ साबला गांव में है 
  3. संत मावजी के द्वारा चोपड़ा नामक ग्रंथ लिखा गया वागडी भाषा में है और संत मावजी महाराज के द्वारा लसाडिया आंदोलन भी चलाया गया था 

गवरी बाई

  1. गवरी बाई को बांगड़ की मीरा भी कहा जाता है डूंगरपुर में महारावल शिव सिंह ने गवरी बाई का मंदिर बनवाया है 

डूंगरपुर जिले की महत्वपूर्ण जानकारी

  1. भारत का पहला आदिवासी महिला सरकारी निजी बैंक बरबुदनिया डूंगरपुर में स्थापित किया गया है 
  2. डूंगरपुर भारत का ऐसा एकमात्र district है जिसने स्वच्छता में पहला स्थान हासिल किया
  3. राजस्थान की प्रथम ऑर्गेनिक मंडी डूंगरपुर में स्थापित की गई है
  4. राजस्थान में डामोर जनजाति डूंगरपुर जिले में सर्वाधिक पाई जाती है
  5. Dungarpur district में स्थित बेणेश्वर मंदिर में उपस्थित शिव लिंग पूरे विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जो खंडित होने के बाद भी पूजा जाता है
  6. डूंगरपुर के गलियाकोट में गोबर के कंडे की होली खेली जाती है 

सरकारी परीक्षाओ में पूछे जाने वाले Rajasthan Gk के प्रश्न 


प्रश्न 1.  नौलखा बावड़ी का निर्माण किसने करवाया 

उत्तर – Dungarpur की महारावल आसकरा की रानी प्रेमल देवी के द्वारा करवाया गया था 


प्रश्न 2. डूंगरपुर जिले की जनसंख्या कितनी है 

उत्तर - Dungarpur की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 13,88,552 है 


प्रश्न 3 Dungarpur district में कितने गांव हैं

उत्तर - 980 गाँव इस जिले में स्थित है 


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